Ax+/URN0bKYQzZP4Oo66EypEV6M8gNhoWNw4HsDBo/2yNB6vIAjyBw== SukhwalSamajUdaipur: मंत्र और उसका अर्थ

मंत्र और उसका अर्थ

गायत्री मंत्र -                                     



अर्थ -

हे प्राणस्वरूप , दुःखहर्ता और सर्वव्यापक , आनन्द के देने वाले प्रभो ! जो आप सर्वज्ञ और सकल जगत के उत्पादक है ,हम आपके उस पूजनीयतम ,पापनाशक स्वरूप तेज का ध्यान करते है ,जो हमारी बुद्धियो को प्रकाशित करता है। हे परमपिता परमात्मा ! आपसे हमारी बुद्धि कदापि विमुख न हो।  आप हमारी बुद्धियो में सदैव प्रकाशित रहें और हमारी बुद्धियो को सत्कर्मो में प्रेरित करें ,ऐसी प्रार्थना है। 
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श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी। ...... 

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ! हे नाथ नारायण वासुदेव। 
यह महामंत्र है , जिसका जाप अर्थ  सहित करना चाहिये। प्रभु नामो के अर्थ इस प्रकार है -
श्री कृष्ण   -    हे प्रभो। आप सभी के मन को आकर्षित करने वाले है। अतः आप मेरा  मन भी अपनी और आकर्षित कीजिऐ। 
गोविन्द     -   इन्द्रियों के रक्षक भगवान। आप मेरी इन्द्रियों को स्वयं में लीन करें। 
हरे           -   हे दुःखहर्ता ! मेरे दु:खो का भी हरण करे। 
मुरारी       -   हे मुर राक्षस के विजेता ! मेरे मन मे बसे हुए काम -क्रोध आदि राक्षसो का नाश कीजिए। 
हे नाथ      -   आप नाथ है और मेँ आपका सेवक हूँ। 
नारायण    -   मेँ  नर हूँ और आप नारायण। 
वासुदेव     -  वसु का अर्थ है प्राण ! मेरे प्राणों की आप रक्षा करें मैने अपना मन आपके चरणों में अर्पित कर दिया है। 


महामृत्युजय मंत्र और उसका अर्थ -

                                                                                                                             

''ॐ हौ जू सः ॐ भूर्भवः स्व: ,ॐ ,त्रयम्बर्क यजामहे सुगन्धिम पुस्टिवर्धनम। उर्वारुकमिव बन्धनांमृत्योर्मुक्षीय मामृतात। स्व:भुव:भू:ॐ। स::जू हों  ॐ ।''यह सम्पुटिय  महामृत्युजय मंत्र  है। जिसका अर्थ निम्न है :-

''मेँ ब्रह्मा विष्णु एवं रूद्र इन तीनो के उत्पादक पिता उन परब्रह्म परमात्मा की वन्दना करता हूँ ,जिनका यश तीनो लोको में फैला हुआ है और जो विश्व के बीज एवं उपासको के अणिमादि ऐश्वयों के वर्धक है। वे अपने मूल से पृथक हुए ककड़ो के फल की तरह मुझे मृत्यु या मर्त्यलोक से मुक्त कर अमृत्व प्रदान करे। 
   यह मंत्र संजीवनी नाम से भी जाना जाता है। जीवन में दुर्घटनाऐ प्रतिदिन होती है ,इस मंत्र के द्व्रारा सर्पदश ,एवं सभी प्रकार की दुर्घटनाओ से जीवन की रक्षा हो सकती है। यह मंत्र  मोक्ष का भी साधन है।

   णमोकार मंत्र - यह नवकार मंत्र जैन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण  मंत्र और इसे किसी भी समय पढ़ा जा सकता है। इस मंत्र को नमस्कार या नमोकार मंत्र भी कहा जाता है। सामयिक (जैन ध्यान ) करते हुए जैनियों द्व्रारा सुनाई जाने वाली पहली प्रार्थना है। मंत्र का ध्यान किसी को याद रखने में मदद करता है कि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य ,जैन धर्म का मुख्य संदेश शामिल है। 

 ।।   णमोकार  मंत्र  ।।    णमो अरिहंताणं,  णमो सिद्धांणं,  णमो आयरियाणं,  णमो उवज्झायाणं ,णमो लोए सव्व साहुणं ,एसो पंच णमोक्कारी सव्व पावप्पणसणो।  मंगलाणं च सव्वेसिं ,पाढ़मं हवइ  मंगलं ।। 

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