Ax+/URN0bKYQzZP4Oo66EypEV6M8gNhoWNw4HsDBo/2yNB6vIAjyBw== SukhwalSamajUdaipur: मथुरा - वृन्दावन यात्रा

मथुरा - वृन्दावन यात्रा

मथुरा - वृन्दावन यात्रा -

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 मथुरा  श्री कृष्ण की मथुरा ,नई दिल्ली से 146 KM मात्र दूर है। मथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। यहाँ 5000 मंदिर बने हुए है। यहाँ मंदिरो में सबसे प्रसिद्ध श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर है जो जेल सेल के चारो बनाया गया था। यहाँ श्री कृष्ण का जन्म उनके माता-पिता को मथुरा के  राजा कंस ने कैद कर रखा था इसी स्थान पर हुआ। भारत में सबसे सम्मानित मंदिर परिसर मथुरा के पुराने शहर के पश्चिम में स्थित है और वर्ष दौरान तीर्थयात्रियों द्व्ररा घिरा रहता है,जिनकी सख्या त्योहारों के दौरान तेजी से बद जाती हे। श्री कृष्ण की विशाल मूर्ति 4 मीटर लंबी और ठोस सोने की से बनी थी ,जिसे गजनी के महमूद द्व्ररा हमले के दोहरान  चुराया गया था। वर्तमान में श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर काफी नया है। आने वाले यात्रियों को श्री कृष्ण का जीवन ,बलराम  और प्रिय राधाजी  चरणबद्ध चित्र देखने को मिलेंगे। यहाँ से 4 KM दूर श्री द्व्रारकाधीश का मंदिर है। यह भव्य मंदिर प्राचीन है जिसमे श्री द्व्रारकाधीश की मूर्ति साथही रुक्मणिजी  एवं राधाजी की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर बाहर से दिखाई नहीं पड़ता है। तंग गलियों से जाना पड़ता है। यह मंदिर सुबह 6.30 से 10.30 एवं सांय 3.30 से 7 बजे खुलता है इसका ध्यान रखे। यह मंदिर अति सुन्दर है एवं मन में भक्ति जगाता है। मथुरा यमुना किनारे 25 घाट बने हुए है जिसमे विश्राम घाट प्रमुख है। 

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वृन्दावन - मथुरा से वृन्दावन 14.2 KM  दूर है यहाँ सबसे पहले पागल बाबा का मंदिर है जो सगमरमर से बना है। इसके बाद प्रेम मंदिर जो अति सुन्दर बना हुआ है। इस  मंदिर के निर्माण में 11 वर्ष एवं 100 करोड़ रुपये खर्च हुए यहाँ श्री कृष्ण की लीलाओ के दृश्य बनाये गए है जो अति सुन्दर है। यहाँ मंदिर दोपहर 12 से 4 बजे तक बंद रहते है इसका ध्यान रखे। 


गोकुल - यहाँ श्री कृष्ण जन्म के बाद 11 साल तक रहे। मथुरा से गोकुल 9.3 KM की दुरी पर बसा है। यही की गलियों में श्री कृष्ण का बचपन बिता था। यही जन्माष्मी को रात 12 बजे  वसुदेवजी श्री कृष्ण को मथुरा के राजा कंस कारागृह से लाये थे। यहाँ नन्दबाबाजी का मंदिर बना हुआ है। 

श्री कृष्ण के माता-पिता श्री वसुदेव - देवकी थे। माता यशोदाजी ने श्री कृष्ण का लालन पालन किया था।
यहाँ लोग मिलने पर नमस्कार की बजाय राधे -राधे बोलते है।