Ax+/URN0bKYQzZP4Oo66EypEV6M8gNhoWNw4HsDBo/2yNB6vIAjyBw== SukhwalSamajUdaipur: गणपति स्थापना एवं पूजा की सरल विधि -

गणपति स्थापना एवं पूजा की सरल विधि -

गणपति स्थापना एवं पूजा की सरल विधि -

भगवान गणेश हिन्दू धर्म में सबसे लोकप्रिय देवताओ में से एक है। भगवान गणेश को गणपति और विनायक नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू लोग अपने सभी धार्मिक कार्यो में सर्व प्रथम पूजा एवं स्थपना  भगवान गणेश की करते है। भगवान गणेश भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र है।भगवान गणेश क्रमशः ज्ञान ,आध्यात्मिकता  और समृद्धि के रूप में बुद्धि ,सिद्धि और रिद्धि  तीन गुणों के अवतार है। भगवान गणेश स्वयं  बुद्धि का व्यक्तितत्व है।अन्य दो गुण देवताओ के रूप  वयक्त किए जाते है और उन्हें  भगवान गणेश के वाणिजय माना जाता है।  ऐसा माना जाता है कि रिद्धि और सिद्धि भगवान ब्रह्म की बेटिया थी। जिन्होंने स्वयं भगवान गणेश के विवाह समारोह का आयोजन किया था। शिव पुराण के अनुसार ,भगवान गणेश के दो बेटे थे जिन्हे शुभ और लाह  के रूप में नामित किया गया था।  शुभ और लाह  क्रमश: शुभकामनाऍ और लाभ का व्यक्तित्व है। शुभ देवी रिद्धि के पुत्र थे लाह देवी सिद्धि के पुत्र थे। भगवान गणेश की जयंती गणेश चतुर्थी के रूप में पुरे देश में शहर से लेकर महानगर तक बड़े धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। भगवान गणेश के 8 अवतार है। जिसमे अष्ट विनायक सबसे महत्वपूर्ण है। भगवान गणेश  की 32 विभिन्न रूपों में पूजा की जाती है। 

बुधवार के दिन को  गणपति का दिन माना जाता है।इसलिए बुधवार को गणेशजी की पूजा की जाती है  परन्तु गणेश चतुर्थी को पूजा का बड़ा महत्त्व है।गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का जन्मदिन है इस दिन गणपतिजी की उत्पति हुई । इसीलिए इस दिन पूजा कर आशीर्वाद लेते है। इस दिन  गणपति की प्रतिमा श्रद्धा  अनुसार छोटी बड़ी घर लाकर 1,3,5,7,11 दिन पूजा कर 10 दिन बाद पानी में विसर्जित करते है।यह त्यौहार पुरे देश में बड़े हर्ष से मनाया जाता है। पूजा में कोई त्रुटि न रहे इस का ध्यान रखे।
गणेश पूजा की आवश्यक सामग्री - गणेश प्रतिमा ,स्नान कराने हेतु पात्र ,अक्षत यानि चावल के दाने ,धूप ,दीप अगरबत्ती और कपूर ,मोदक ,लाल चन्दन ,रोली ,सिंदूर और हल्दी ,लाल पुष्प ,पान का पता ,फल ,गंगाजल ,पंचामृत ,नैवेद्य और आरती के लिए पूजा की थाली ,चौकी  मूर्ति स्थापित करने हेतु ,लाल कपडा, आसन। 

गणेश पूजा की सरल विधि - 

स्थापना -नित्य कर्म स्नान अादि से निवृत होकर पूजा प्रारम्भ करे सबसे पहले किसी साफ स्थान जिस स्थान पर पूजा करनी है वहा गगाजल से छिटकाव कर शुद्ध करे। मूर्ति को स्थापित करदे मूर्ति के सामने आसन लगा कर आप बैठ जावे। पूजा प्रारम्भ करने से पूर्व संकलप ले संकलप लेने के लिए हाथ में जल पुष्प अक्षत लेकर आह्वान करते समय दिन वर्ष दिनांक स्थान अपना नाम एवं गोत्र अपनी मनोकामना का उच्चारण करने  के  बाद हाथ की सामग्री जमीन पर छोड़ दे।इसके बाद  मूर्ति पर अक्षत छिड़कते हुए उनका आवाहन करे की है गणपति आप इस मूर्ति में विराजे आग्रह करने के पश्चात् मूर्ति को  पात्र में रखे एवं पैर धोये  गणपति की मूर्ति मुख शुद्धि हेतु जल चढ़ाये इसके बाद पंचामृत से मूर्ति का स्न्नान करे बाद में पुनः जल से स्न्नान करे। इसके बाद मूर्ति को पात्र से बहार निकालकर चौकी  पर लाल कपडा बिछाए एवं उस पर गणपतिजी को विराजमान करदे इसके बाद वस्त्र अर्पित करे। वस्त्र अर्पित करने के बाद उन्हें लाल चन्दन ,रोली , हल्दी और सिंदूर लगाए। इसके बाद भगवान को लाल पुष्प चढ़ाये।  अब भगवान गणेश को नैवेद्य अर्पित करे। इसके पश्चात फल अर्पित करे।  गणपतिजी को तुलसी नहीं चढ़ती है इसका ध्यान रखे। अब गणपतिजी को धुप एवं अगरबत्ती दिखाए। पूजा सम्पूर्ण हो जाने के पश्चात् 108 बार गणेश मंत्र का जाप करे। इसके बाद एक थाली में पान का पते में कपूर जला कर गणेशजी की आरती करे। आरती समूर्ण हो जाने के बाद पूजा में किसी भूल चूक हुई हो तो उसके लिए श्रमा मागे एवं प्रार्थना करे की यह पूजा स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान करे। 
 गणेश चतुर्थी कैलेंडर- 



गणपति मंत्र - 

| ॐ गं गणपतये नमो नमः |

श्री गणपतिजी के 108 नाम-