Ax+/URN0bKYQzZP4Oo66EypEV6M8gNhoWNw4HsDBo/2yNB6vIAjyBw== SukhwalSamajUdaipur: नवरात्री पर माँ अम्बे की नो दिन की सरल पूजा विधि

नवरात्री पर माँ अम्बे की नो दिन की सरल पूजा विधि

नवरात्री पर माँ अम्बे की नो दिन की सरल पूजा विधि:-                                    

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नवरात्री पर पूरे देश में माँ के मंदिरो में भक्तो की भारी भीड़ रहती हैं। रात को गरबा रमा जाता हैं। गुजरात से चला गरबा आज देश के छोटे बड़े शहरो से लेकर महानगर एवं गावो तक में रमा जाने लगा हैं। लोग सजने सवरने के लिए पार्लर में जाते हैं। गरबा रमने के लिए नये कपडे खरीदते है। टेटुआ बनवाते हैं। कई क्लब एवं संस्थाए  प्रवेश टिकट भी रखने लगी है। कोलकाता में काली मंदिर में भारी भीड़ रहती है। 

सामग्री - 


मिट्टी का पात्र ,साफ  मिट्टी , जौ  ,चावल ,लाल कपडा ,ताम्बे का कलश  पानी भरने के लिए ,मिटी का ढक्कन, पानी वाला नारियल ,सुपारी ,आम  के पत्ते ,लालफुलो की माला ,पुष्प ,सिक्के ,चौकी ,अगरबत्ती ,लच्छा (मोली ),गंगा जल ,दुर्गा माँ की तस्वीर,दीपक। 

प्रथम भाग -

 सर्व प्रथम पूजनीय गणपतिजी को क्लश के रूप में स्थापित किया जाता हैं  मिट्टी का पात्र ले इसमें मिट्टी डाले फिर जौ के बीज डाले फिर थोड़ा पानी डाले। कलश के मुँह पर लच्छा (मोली ) बांध  दे। अब कलश  को शुद्ध पानी से भरले। इसमें साबुत सुपारी डाले  गंगाजल एवं सिक्के रखे। कलश में आम के पत्ते रखकर कलश का मुँह  दक्कन से बंद करदे। ढक्कन  पर चावल रखे। इस चावल रखे ढक्कन  पर नारियल पर तिलक लगा कर स्थापित करदे। इस कलश को उठाकर जौ वाले मिट्टी का पात्र पर रख दे। अब चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की तस्वीर स्थापित करे। अब कलश को माँ दुर्गा की तस्वीर के बाई और रखे। इसके बाद कलश एवं माँ दुर्गा की धुप,अगरबत्ती से पूजा करे। फूलमाला ,पुष्प चढ़ाये। आहवान करे की वे नो दिनों तक आपके घर पधारे। 

दूसरे भाग  - 

नो दिनों तक नो देवियो  की पूजा का विधान हैं पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करे ,धुप -अगरबत्ती करे ,माला पुष्प एवं प्रसाद चढ़ावे एवं माता के सामने हाथ जोड़कर  पार्थना  करे हे माँ शैलपुत्री रूप में प्रसिद्ध अम्बे आप मेरा प्रणाम स्वीकार करे फिर दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी धुप -अगरबत्ती एवं दीपक करे ,माला पुष्प एवं प्रसाद चढ़ावे एवं माता के सामने हाथ जोड़कर पार्थना करे कि ब्रह्मचारिणी रूप प्रसिद्ध अम्बे माँ आपको मेरा शत शत प्रणाम इसी प्रकार तीसरे दिन माँ चन्द्रघन्टा की पूजा करे। चौथे दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा करे। पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की। छटे दिन माँ कात्यायनी की उसी प्रकार पूजा करे।सातवे दिन माँ कालरात्रि की पूजा करे। आठवे दिन माँ महागौरी की पूजा करे। नवे दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा करे। 


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अंतिम भाग-                                      

नवरात्री के नवें दिन अम्बे माँ ,दुर्गा माँ ,सिद्धिदात्री  की पूजा की जाती हैं. सबसे पहले ,धुप -अगरबत्ती करे ,माला पुष्प चढ़ावे एवं जो भोज  श्रद्धा अनुसार  बनाया है उस प्रसाद का  माँ को  भोग लगाए। नो कन्याओ को यह भोजन करवावे।दक्षिणा देवे।  इसके बाद घट पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में खाए। कलश का जल अपने पुरे घर में छिड़के। सिक्के निकालकर अपनी तिजोरी में रखे। देवी माँ की तस्वीर अपने घर में बने मंदिर(पूजा के स्थान ) में रखे। घट पर रखे चवाल पक्षी को डालदे। जौ को नदी में विसर्जित करे। 

नवरात्रि गरबा रास -  नवरात्रि पर गरबा रास पुरे देश में उत्साह एवं उमंग से रमा जाता हैं। गुजरात में इसका उत्साह देखते बनता हैं