Ax+/URN0bKYQzZP4Oo66EypEV6M8gNhoWNw4HsDBo/2yNB6vIAjyBw== SukhwalSamajUdaipur: Shradh (श्राद्ध) एवं पितृदोष

Shradh (श्राद्ध) एवं पितृदोष



Shradh (श्राद्ध )-

पितृ पक्ष हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद  श्राद्ध करना जरुरी माना जाता हैं। मान्यता के अनुसार किसी व्यक्ति का विधि पूर्वक श्राद्ध एवं तर्पण न किया जाये तो उसकी आत्मा को इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती हैं। उसकी आत्मा इस संसार में भटकती रहती हैं। 

पितृदोष -घर में सुख नहीं आता ,घर में कलह अशांति रहती हैं। घर में आर्थिक हालत खराब हो जाते।बहार के लोग घर के लोगो परेशान करते हैं। पितृदोष से परिवार छोटा होता चला जाता हैं।बच्चो के  विवाह नहीं हो रहे हैं। संतान सुख नहीं मिल रहा होता हैं। रोग नहीं जाते हैं। पितृदोष दूर नहीं होगा तो ये कष्ट दूर नहीं होंगे। अन्याय के बुरे परिणाम पितृदोष  के रूप में मिलते हैं। जिस घर में स्त्रिया की बेइज्जत या परेशान रहती हैं उनकी तीन पीढ़िया परेशान रहेगी। जीवहत्या  से पितृदोष लगता हैं।   

पितृ पक्ष का महत्व - शास्त्रों के अनुसार देवताओ को खुश करने के पहले अपने पूर्वजो यानि पितृरो को खुश करना चाहिए। पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली  दोषो  में से एक माना जाता हैं। पितृो की  शांति के लिए हर वर्ष पितृ पक्ष में श्राद्ध होते हैं। मान्यता हैं की इस समय यमराज अपने  पितृरो  को आजाद कर देते हैं ताकि वे अपने परिवार जनो से श्राद्ध ग्रहण कर सके। 
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क्यों जरुरी है श्राद्ध देना ?-मान्यता हैं कि अगर पितृ नाराज हो जाये तो जीवन में कई समस्या का सामना करना पड़ता हैं। पितृरो के नाराज से धन हानि,घर में अशांति ,सन्तानो से परेशानी आदि कई समस्याओ का सामना करना पड़ता हैं। अपने पूवजों का श्राद्ध हर वर्ष करना चाहिए। पहला श्राद्ध मृत्यु के तीन वर्ष बाद विधि विधान से करवाना चाहिए। हर साल पितृ पक्ष  में ब्राह्मणो को भोजन श्रद्धा अनुसार करवाना चाहिए। इसमें गोमाता ,कुत्ते एवं कौवो को भी भोजन डालना चाहिए।
जिस तिथि को आपके पितृ(पूर्वज )  की मृत्यु हुई उस दिन श्राद्ध करना चाहिए। अकाल मृत्यु वाले पितृ का श्राद्ध चतुर्थीदर्शी को तथा जिनकी तिथि याद नहीं उनका श्राद्ध अमावस्या को किया जाता हैं। अमावस्या को सर्व पितरू अमावस्या कहा जाता हैं।  योग्य व्यक्ति से श्राद्ध कर्म करवाना चाहिए। दान एवं भोजन करवाना चाहिए। पशु -पक्षियों को भोजन करवाना चहिए।
श्राद्ध में पितृरो को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता जाता हैं। पिंडो को श्राद्ध में दिया गया भोजन से पितृरो को प्राप्त होता हैं।
 इस वर्ष श्राद्ध पक्ष इस प्रकार हैं -


अगर आप धार्मिक यात्रा पर जाते हैं तो वहां श्राद्ध अवश्य करवावे। हरिद्वार , गयाजी आदि.स्थानों पर। 
जो व्यक्ति अपने माता -पिता एवं बड़ो की  जीवित रहते सेवा नहीं करता एवं उन्हें परेशान करता हैं उसके द्वारा किया गया श्राद्ध पितृक स्वीकार नहीं करते हैं। पितृक परिवार को दुःख देते हैं। हमारे माता -पिता ने ही खुद कष्ट उठाकर कर हमें इस योग्य बनाया की  हम आज अपने पाँव पर  खड़े हैं। आप अपने माँ बाप ,दादा-दादी की खूब सेवा करे। इनके पुन्य प्रताप से घर फूलता फलता हैं। बड़े नसीब वाले होते हैं जिनकी किस्मत में माँ -बाप एवं दादा -दादी की सेवा करने का सुख लिखा होता हैं। सच मानिये अगर आपके धर में बुजर्ग एवं घर में रहने वाली महिलाऐ खुश हैं तो पितृक बनने पर ये आपको परेशान नहीं करेंगे। जीवन बड़ा छोटा हैं न जाने कब बुलावा आ जाये। अतः आप अपने माँ -बाप की अच्छी तरह सेवा करे। उनका हर प्रकार से ध्यान रखे। श्राद्ध तीन पीढी तक का किया जाता हैं।घर में विवाह आदि कोई भी शुभ कार्य हो तो सबसे पहले अपने पितृको को याद करे।